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श्लोक 6.114.19  |
राक्षसाधिपते सौम्य नित्यं मद्विजये रत।
वैदेही संनिकर्षं मे क्षिप्रं समभिगच्छतु॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| हे सौम्य राक्षसराज, मुझे परास्त करने के लिए सदैव तत्पर रहने वाले! विदेहकुमारी से कहो कि वे शीघ्र ही मेरे पास आएँ॥19॥ |
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| O gentle demon king who is always ready to defeat me! Tell Videha Kumari to come to me soon.'॥ 19॥ |
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