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श्लोक 6.114.11  |
एवमुक्ता तु वैदेही प्रत्युवाच विभीषणम्।
अस्नात्वा द्रष्टुमिच्छामि भर्तारं राक्षसेश्वर॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| उनके ऐसा कहने पर वैदेही ने विभीषण को उत्तर दिया - 'राक्षसराज! मैं बिना स्नान किये अभी अपने पति का दर्शन करना चाहती हूँ।' |
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| Upon his saying this, Vaidehi replied to Vibhishan - 'King of demons! I wish to see my husband right now without taking a bath.' |
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