श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 113: हनुमान्जी का सीताजी से बातचीत करके लौटना और उनका संदेश श्रीराम को सुनाना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.113.50 
तस्यास्तद् वचनं श्रुत्वा हनूमान् मारुतात्मज:।
हर्षयन् मैथिलीं वाक्यमुवाचेदं महामति:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
सीताजी के ये वचन सुनकर परम बुद्धिमान पवनपुत्र हनुमानजी मिथिला की राजकुमारी का हर्ष बढ़ाते हुए इस प्रकार बोले-॥50॥
 
On hearing these words of Sita, the most intelligent son of the wind, Hanuman, increasing the joy of the princess of Mithila, spoke thus -॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)