vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 113: हनुमान्जी का सीताजी से बातचीत करके लौटना और उनका संदेश श्रीराम को सुनाना
»
श्लोक 50
श्लोक
6.113.50
तस्यास्तद् वचनं श्रुत्वा हनूमान् मारुतात्मज:।
हर्षयन् मैथिलीं वाक्यमुवाचेदं महामति:॥ ५०॥
अनुवाद
सीताजी के ये वचन सुनकर परम बुद्धिमान पवनपुत्र हनुमानजी मिथिला की राजकुमारी का हर्ष बढ़ाते हुए इस प्रकार बोले-॥50॥
On hearing these words of Sita, the most intelligent son of the wind, Hanuman, increasing the joy of the princess of Mithila, spoke thus -॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×