श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 112: विभीषण का राज्याभिषेक और श्रीरघुनाथजी का हनुमान्जी के द्वारा सीता के पास संदेश भेजना  »  श्लोक 8-10h
 
 
श्लोक  6.112.8-10h 
अथोवाच स काकुत्स्थ: समीपपरिवर्तिनम्॥ ८॥
सौमित्रिं सत्त्वसम्पन्नं लक्ष्मणं दीप्ततेजसम्।
विभीषणमिमं सौम्य लङ्कायामभिषेचय॥ ९॥
अनुरक्तं च भक्तं च तथा पूर्वोपकारिणम्।
 
 
अनुवाद
वहाँ आकर रघुनाथजी ने अपने निकट खड़े हुए बल और तेज से परिपूर्ण सुमित्रानन्दन लक्ष्मण से कहा- 'सौम्य! अब तुम लंका में जाकर इन विभीषण का राज्याभिषेक करो; क्योंकि ये मेरे प्रेमी, भक्त और प्रथम सहायक हैं।'
 
Coming there, Raghunath ji said to Lakshman, Sumitranandan, who was full of strength and radiant energy, standing near him – 'Soumya! Now you go to Lanka and coronate this Vibhishana; Because they are my lovers, devotees and first helpers. 8-9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)