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श्लोक  6.112.4-5h 
राघवस्तु रथं दिव्यमिन्द्रदत्तं शिखिप्रभम्॥ ४॥
अनुज्ञाप्य महाबाहुर्मातलिं प्रत्यपूजयत्।
 
 
अनुवाद
इसके बाद महाबाहु भगवान श्री राम ने मतालिका का बहुत सत्कार किया और उसे इन्द्र द्वारा दिया हुआ अग्नि के समान चमकने वाला दिव्य रथ ले जाने की आज्ञा दी ॥4 1/2॥
 
After this, the mighty-armed Lord Shri Ram honoured Matalika greatly by ordering her to take away the divine chariot given by Indra, which was shining like fire. ॥ 4 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)