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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 111: मन्दोदरी का विलाप तथा रावण के शव का दाह-संस्कार
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श्लोक 98-99h
श्लोक
6.111.98-99h
अधर्मानृतसंयुक्त: कामं त्वेष निशाचर:॥ ९८॥
तेजस्वी बलवाञ्छूर: संग्रामेषु च नित्यश:।
अनुवाद
यह राक्षस भले ही अधार्मिक और असत्यवादी रहा हो, परन्तु युद्ध में यह सदैव तेजस्वी, बलवान और पराक्रमी रहा है॥98 1/2॥
This demon may have been irreligious and untruthful, but in battle he has always been radiant, strong and valiant.॥ 98 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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