श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 111: मन्दोदरी का विलाप तथा रावण के शव का दाह-संस्कार  »  श्लोक 84-85h
 
 
श्लोक  6.111.84-85h 
प्रियामिवोपसंगृह्य किं शेषे रणमेदिनीम्॥ ८४॥
अप्रियामिव कस्माच्च मां नेच्छस्यभिभाषितुम्।
 
 
अनुवाद
प्राणनाथ! आप अपनी प्रिय पत्नी के समान रणभूमि में आलिंगन करके क्यों सो रहे हैं और मुझे अप्रिय क्यों समझते हैं तथा मुझसे बात भी नहीं करना चाहते?॥84 1/2॥
 
Praananath! Why are you sleeping embracing the battlefield like your beloved wife and why do you consider me as unpleasant and do not even want to talk to me?॥ 84 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)