श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 111: मन्दोदरी का विलाप तथा रावण के शव का दाह-संस्कार  »  श्लोक 72-73
 
 
श्लोक  6.111.72-73 
कामक्रोधसमुत्थेन व्यसनेन प्रसङ्गिना॥ ७२॥
निवृत्तस्त्वत्कृतेनार्थ: सोऽयं मूलहरो महान्।
त्वया कृतमिदं सर्वमनाथं राक्षसं कुलम्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे काम और क्रोध से उत्पन्न मोह-जनित दोष के कारण यह सारा धन नष्ट हो गया और सब कुछ नष्ट करने वाली यह महान विपत्ति आई। आज तुमने सम्पूर्ण राक्षस कुल को अनाथ कर दिया है।
 
‘Due to your attachment-related fault born of lust and anger, all this wealth was destroyed and this great calamity that destroyed everything wasfallen. Today you have orphaned the entire demon clan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)