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श्लोक  6.110.5 
ता बाष्पपरिपूर्णाक्ष्यो भर्तृशोकपराजिता:।
करिण्य इव नर्दन्त्य: करेण्वो हतयूथपा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उसकी आँखों से आँसुओं की धारा बह रही थी। वह पति के शोक से अचेत थी और पति के मारे जाने पर हथिनी के समान विलाप कर रही थी।
 
A stream of tears was flowing from her eyes. She was unconscious due to the grief of her husband and was wailing like an elephant when her husband was killed. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)