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ramayan 6.110.22: परन्तु तुम इतने निर्दयी निकले कि सीता को बलपूर्वक बन्दी बना लिया और राक्षसों, हम स्त्रियों और अपने आप को - हम तीनों को - संकट में डाल दिया॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 6.110: रावण की स्त्रियों का विलाप   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.110.22 
त्वया पुनर्नृशंसेन सीतां संरुन्धता बलात्।
राक्षसा वयमात्मा च त्रयं तुल्यं निपातितम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
परन्तु तुम इतने निर्दयी निकले कि सीता को बलपूर्वक बन्दी बना लिया और राक्षसों, हम स्त्रियों और अपने आप को - हम तीनों को - संकट में डाल दिया॥ 22॥
 
‘But you proved so ruthless that you forcibly imprisoned Sita and threw the demons, us women, and yourself—all three of us—into trouble.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)