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श्लोक 16
श्लोक
6.110.16
यो न शक्य: सुरैर्हन्तुं न यक्षैर्नासुरैस्तथा।
सोऽयं कश्चिदिवासत्त्वो मृत्युं मर्त्येन लम्भित:॥ १६॥
अनुवाद
जो देवता, असुर और यक्षों के लिए भी अजेय था, वह दुर्बल प्राणी के समान मनुष्य के हाथों मृत्यु को प्राप्त हुआ।॥16॥
He who was invincible even for the Gods, Asuras and Yakshas, met death at the hands of a human being like a weak creature.'॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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