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श्लोक  6.110.10 
काचिदङ्के शिर: कृत्वा रुरोद मुखमीक्षती।
स्नापयन्ती मुखं बाष्पैस्तुषारैरिव पङ्कजम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
कुछ स्त्रियाँ अपने पति का सिर गोद में लेकर, उनके मुख को देखकर तथा उनके मुख को ओस की बूंदों से कमल के समान आँसुओं से नहलाकर रोने लगीं।
 
Some, taking the head of their husband in their lap, looking at his face and bathing his face with teardrops like lotus from dewdrops, began to weep.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)