श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 11: रावण और उसके सभासदों का सभाभवन में एकत्र होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.11.4 
तमास्थाय रथश्रेष्ठं महामेघसमस्वनम्।
प्रययौ रक्षसां श्रेष्ठो दशग्रीव: सभां प्रति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महामेघों की गर्जना के समान गर्जने वाले उस उत्तम रथ पर आरूढ़ होकर राक्षसमुख दशग्रीव सभाभवन की ओर चला॥4॥
 
Mounted on that excellent chariot that roared like the thunder of great clouds, the demon-headed Dashagriva proceeded towards the assembly hall. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)