श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 109: विभीषण का विलाप और श्रीराम का उन्हें समझाकर रावण के अन्त्येष्टि संस्कार के लिये आदेश देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.109.2 
वीरविक्रान्त विख्यात प्रवीण नयकोविद।
महार्हशयनोपेत किं शेषे निहतो भुवि॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे यशस्वी वीर और पराक्रमी भाई दशानन! हे कुशल और व्यवहारकुशल! तुम सदैव बहुमूल्य शय्याओं पर सोते थे, आज मारे जाने पर इस प्रकार भूमि पर क्यों पड़े हो?
 
Oh, the famous valiant and brave brother Dashanan! Oh, the skilled and pragmatic one! You always used to sleep on precious beds, why are you lying on the ground like this after getting killed today?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)