| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 107: श्रीराम और रावण का घोर युद्ध » श्लोक 8 |
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| | | | श्लोक 6.107.8  | तत: क्रोधाद् दशग्रीव: शरान् संधाय वीर्यवान्।
मुमोच ध्वजमुद्दिश्य राघवस्य रथे स्थितम्॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | उस समय महाबली रावण ने क्रोध में आकर श्री रघुनाथजी के रथ पर लहराती हुई ध्वजा पर बाण चलाकर उन्हें छोड़ दिया। | | | | At that time the mighty Ravana, in anger, aimed his arrows at the flag fluttering on Sri Raghunath's chariot and released those arrows. | | ✨ ai-generated | | |
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