vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 107: श्रीराम और रावण का घोर युद्ध
»
श्लोक 56-57h
श्लोक
6.107.56-57h
छिन्नमात्रं च तच्छीर्षं पुनरेव प्रदृश्यते॥ ५६॥
तदप्यशनिसंकाशैश्छिन्नं रामस्य सायकै:।
अनुवाद
उसके कटते ही पुनः एक नया सिर प्रकट हुआ, किन्तु वह भी श्री राम के वज्र-सदृश बाणों द्वारा कट गया।
As soon as it was cut off, a new head appeared to grow again, but that too was cut off by Sri Rama's thunderbolt-like arrows. 56 1/2
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas