श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 107: श्रीराम और रावण का घोर युद्ध  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  6.107.56-57h 
छिन्नमात्रं च तच्छीर्षं पुनरेव प्रदृश्यते॥ ५६॥
तदप्यशनिसंकाशैश्छिन्नं रामस्य सायकै:।
 
 
अनुवाद
उसके कटते ही पुनः एक नया सिर प्रकट हुआ, किन्तु वह भी श्री राम के वज्र-सदृश बाणों द्वारा कट गया।
 
As soon as it was cut off, a new head appeared to grow again, but that too was cut off by Sri Rama's thunderbolt-like arrows. 56 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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