श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 107: श्रीराम और रावण का घोर युद्ध  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  6.107.49 
स्वस्ति गोब्राह्मणेभ्यस्तु लोकास्तिष्ठन्तु शाश्वता:।
जयतां राघव: संख्ये रावणं राक्षसेश्वरम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
सबके मुख से यही बात निकलने लगी- 'गौओं और ब्राह्मणों का कल्याण हो, प्रवाह रूप में सदा विद्यमान रहने वाले इन लोकों की रक्षा हो और श्री रघुनाथजी युद्ध में राक्षसराज रावण पर विजयी हों॥49॥
 
The same thing started coming out of everyone's mouth - 'May the cows and Brahmins be well-being, may these worlds which always exist in the form of flow be protected and may Shri Raghunath ji be victorious over the demon king Ravana in the war. 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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