श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 107: श्रीराम और रावण का घोर युद्ध  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  6.107.43-44h 
रावणोऽपि तत: क्रुद्धो रथस्थो राक्षसेश्वर:॥ ४३॥
गदामुसलवर्षेण रामं प्रत्यर्दयद् रणे।
 
 
अनुवाद
तब रथ पर बैठा हुआ राक्षसराज रावण क्रोधित हो उठा और युद्धस्थल में गदाओं और मूसलों की वर्षा करके श्री राम को कष्ट देने लगा।
 
Then the demon king Ravana, seated on his chariot, became enraged and began tormenting Sri Rama on the battlefield with a shower of maces and pestles. 43 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)