|
| |
| |
श्लोक 6.107.40-41h  |
मातलेस्तु महावेगा: शरीरे पतिता: शरा:॥ ४०॥
न सूक्ष्ममपि सम्मोहं व्यथां वा प्रददुर्युधि। |
| |
| |
| अनुवाद |
| युद्धस्थल में मातलि के शरीर पर पड़ने वाले वे अत्यन्त शक्तिशाली बाण भी उसे किंचितमात्र भी स्नेह या पीड़ा नहीं पहुँचा सके ॥40 1/2॥ |
| |
| Those extremely powerful arrows falling on Matali's body on the battlefield could not cause him even the slightest of affection or pain. ॥ 40 1/2॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|