श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 107: श्रीराम और रावण का घोर युद्ध  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  6.107.40-41h 
मातलेस्तु महावेगा: शरीरे पतिता: शरा:॥ ४०॥
न सूक्ष्ममपि सम्मोहं व्यथां वा प्रददुर्युधि।
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में मातलि के शरीर पर पड़ने वाले वे अत्यन्त शक्तिशाली बाण भी उसे किंचितमात्र भी स्नेह या पीड़ा नहीं पहुँचा सके ॥40 1/2॥
 
Those extremely powerful arrows falling on Matali's body on the battlefield could not cause him even the slightest of affection or pain. ॥ 40 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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