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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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श्लोक 2
श्लोक
6.107.2
ततो राक्षससैन्यं च हरीणां च महद्बलम्।
प्रगृहीतप्रहरणं निश्चेष्टं समवर्तत॥ २॥
अनुवाद
उस समय राक्षसों और वानरों की विशाल सेनाएँ हाथ में शस्त्र लिए खड़ी रहीं - किसी ने किसी पर आक्रमण नहीं किया॥2॥
At that time the huge armies of demons and monkeys stood still with weapons in their hands - no one attacked anyone.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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