Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.106.7-9h: उनकी वाणी ऐसी थी मानो वज्र के प्रहार से पर्वत फट रहा हो। शत्रुओं के मेघ के समान दिखने वाले रथ को आते देख श्री रामचंद्रजी ने बड़े जोर से धनुष की टंकार की। उस समय उनका धनुष दूसरे दिन के चंद्रमा के समान दिखाई दे रहा था। श्री राम ने इन्द्र के सारथि मातलि से कहा - ॥7-8 1/2॥ | ramayan सर्ग 6.106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उनकी वाणी ऐसी थी मानो वज्र के प्रहार से पर्वत फट रहा हो। शत्रुओं के मेघ के समान दिखने वाले रथ को आते देख श्री रामचंद्रजी ने बड़े जोर से धनुष की टंकार की। उस समय उनका धनुष दूसरे दिन के चंद्रमा के समान दिखाई दे रहा था। श्री राम ने इन्द्र के सारथि मातलि से कहा - ॥7-8 1/2॥
His voice sounded as if a mountain was splitting due to the impact of a thunderbolt. Seeing the enemy's chariot which looked like a cloud approaching, Shri Ramchandraji twirled his bow with great force. At that time his bow looked like the moon on the second day. Shri Ram said to Indra's charioteer Matali - ॥ 7-8 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥