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ramayan 6.106.6-7h: उस पर लहराती हुई ध्वजाएँ बिजली के समान चमक रही थीं। वहाँ रावण का धनुष था, जिससे वह रथ इन्द्रधनुष की आभा बिखेर रहा था और बाणों की श्रृंखला बरसा रहा था। इससे वह जल बरसा रहे बादल के समान प्रतीत हो रहा था।   |   ramayan सर्ग 6.106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  6.106.6-7h 
तडित्पताकागहनं दर्शितेन्द्रायुधप्रभम्॥ ६॥
शरधारा विमुञ्चन्तं धाराधरमिवाम्बुदम्।
 
 
अनुवाद
उस पर लहराती हुई ध्वजाएँ बिजली के समान चमक रही थीं। वहाँ रावण का धनुष था, जिससे वह रथ इन्द्रधनुष की आभा बिखेर रहा था और बाणों की श्रृंखला बरसा रहा था। इससे वह जल बरसा रहे बादल के समान प्रतीत हो रहा था।
 
The flags fluttering on it appeared like lightning. With the bow of Ravana that was there, that chariot was sprinkling the rainbow's glow and showering a series of arrows. Due to this, it appeared like a cloud pouring water. 6 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)