ततो निरीक्ष्यात्मगतानि राघवो
रणे निमित्तानि निमित्तकोविद:।
जगाम हर्षं च परां च निर्वृतिं
चकार युद्धे ह्यधिकं च विक्रमम्॥ ३६॥
अनुवाद
भगवान राम, जो शकुन-अपशकुन में पारंगत थे, युद्धभूमि में प्राप्त शुभ शकुनों को देखकर अत्यंत प्रसन्न और संतुष्ट हुए तथा युद्ध में और भी अधिक वीरता प्रदर्शित की।
Lord Rama, who was well versed in omens, felt great joy and satisfaction on observing the auspicious omens that he received on the battlefield and displayed even greater valour in the war.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे षडधिकशततम: सर्ग: ॥ १ ०६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामाय ण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें एक सौ छठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ०६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥