Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.106.32: उसके घोड़े अपनी जघन से अग्नि की चिंगारियाँ उगल रहे थे और आँखों से आँसू बहा रहे थे। इस प्रकार वे अग्नि और जल दोनों को एक साथ प्रकट कर रहे थे। 32. | ramayan सर्ग 6.106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जघनेभ्य: स्फुलिङ्गाश्च नेत्रेभ्योऽश्रूणि संततम्।
मुमुचुस्तस्य तुरगास्तुल्यमग्निं च वारि च॥ ३२॥
अनुवाद
उसके घोड़े अपनी जघन से अग्नि की चिंगारियाँ उगल रहे थे और आँखों से आँसू बहा रहे थे। इस प्रकार वे अग्नि और जल दोनों को एक साथ प्रकट कर रहे थे। 32.
His horses were spewing sparks of fire from their pubic parts and shedding tears from their eyes. Thus they were manifesting both fire and water simultaneously. 32.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥