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ramayan 6.106.28: युद्धभूमि पर धूल उड़ाने वाली वायु विपरीत दिशा में बह रही थी, जिससे राक्षसराज रावण की आंखें बंद हो रही थीं। 28.   |   ramayan सर्ग 6.106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.106.28 
प्रतिकूलं ववौ वायू रणे पांसून् समुत्किरन्।
तस्य राक्षसराजस्य कुर्वन् दृष्टिविलोपनम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि पर धूल उड़ाने वाली वायु विपरीत दिशा में बह रही थी, जिससे राक्षसराज रावण की आंखें बंद हो रही थीं। 28.
 
The wind raising dust on the battlefield was blowing in the opposite direction, closing the eyes of the demon king Ravana. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)