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ramayan 6.106.14-15: श्री रामचन्द्रजी के इन वचनों से देवताओं में श्रेष्ठ सारथि मातलि को बड़ा संतोष हुआ और उन्होंने रावण के विशाल रथ को दाहिनी ओर रखकर अपना रथ आगे बढ़ाया। उसके पहियों से इतनी धूल उड़ी कि उसे देखकर रावण काँप उठा।   |   ramayan सर्ग 6.106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  6.106.14-15 
परितुष्ट: स रामस्य तेन वाक्येन मातलि:।
प्रचोदयामास रथं सुरसारथिरुत्तम:॥ १४॥
अपसव्यं तत: कुर्वन् रावणस्य महारथम्।
चक्रसम्भूतरजसा रावणं व्यवधूनयत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी के इन वचनों से देवताओं में श्रेष्ठ सारथि मातलि को बड़ा संतोष हुआ और उन्होंने रावण के विशाल रथ को दाहिनी ओर रखकर अपना रथ आगे बढ़ाया। उसके पहियों से इतनी धूल उड़ी कि उसे देखकर रावण काँप उठा।
 
With these words of Shri Ramchandraji, Matali, the best charioteer of the gods, was very satisfied and he drove his chariot forward keeping Ravana's huge chariot on the right. So much dust flew from its wheels that Ravana trembled on seeing it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)