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ramayan 6.106.12: ‘सब प्रकार के भय और चिन्ता को त्यागकर, मन और नेत्रों को स्थिर रखकर, घोड़ों की लगाम को वश में करके रथ को तेजी से चलाओ।॥12॥   |   ramayan सर्ग 6.106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.106.12 
अविक्लवमसम्भ्रान्तमव्यग्रहृदयेक्षणम्।
रश्मिसंचारनियतं प्रचोदय रथं द्रुतम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘सब प्रकार के भय और चिन्ता को त्यागकर, मन और नेत्रों को स्थिर रखकर, घोड़ों की लगाम को वश में करके रथ को तेजी से चलाओ।॥12॥
 
‘Leaving behind all fear and anxiety, keeping the mind and eyes steady, control the reins of the horses and drive the chariot fast.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)