श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 105: अगस्त्य मुनि का श्रीराम को विजय के लिये “आदित्यहृदय” के पाठ की सम्मति देना  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  6.105.8-9 
एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिव: स्कन्द: प्रजापति:।
महेन्द्रो धनद: कालो यम: सोमो ह्यपां पति:॥ ८॥
पितरो वसव: साध्या अश्विनौ मरुतो मनु:।
वायुर्वह्नि: प्रजा: प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकर:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ये हैं ब्रह्मा, विष्णु, शिव, स्कंद, प्रजापति, इंद्र, कुबेर, काल, यम, चंद्रमा, वरुण, पितृ, वसु, साध्य, अश्विनी कुमार, मरुद्गण, मनु, वायु, अग्नि, प्रजा, प्राण, ऋतुओं के उद्घोषक और प्रकाश की किरणें।
 
These are Brahma, Vishnu, Shiva, Skanda, Prajapati, Indra, Kuber, Kaal, Yama, Moon, Varun, Pitr, Vasu, Sadhya, Ashwini Kumar, Marudgan, Manu, Vayu, Agni, Praja, Prana, the revealers of the seasons and the rays of light.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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