vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 105: अगस्त्य मुनि का श्रीराम को विजय के लिये “आदित्यहृदय” के पाठ की सम्मति देना
»
श्लोक 25
श्लोक
6.105.25
एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च।
कीर्तयन् पुरुष: कश्चिन्नावसीदति राघव॥ २५॥
अनुवाद
हे राघव! जो कोई विपत्ति, दुःख, कठिन मार्ग या अन्य किसी भय के समय सूर्यदेव का नाम जपता है, उसे दुःख नहीं भोगना पड़ता॥ 25॥
Raghava! Whoever chants the name of the Sun God during times of adversity, pain, difficult path or any other fear does not have to suffer.॥ 25॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas