श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 105: अगस्त्य मुनि का श्रीराम को विजय के लिये “आदित्यहृदय” के पाठ की सम्मति देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.105.17 
जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नम:।
नमो नम: सहस्रांशो आदित्याय नमो नम:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
आप विजय के स्वरूप और कल्याण के दाता हैं। आपका रथ हरे घोड़ों द्वारा खींचा जाता है। मैं आपको बारंबार नमस्कार करता हूँ। हे सहस्रों किरणों से सुशोभित भगवान सूर्य! मैं आपको बारंबार नमस्कार करता हूँ। आप अदिति के पुत्र होने के कारण आदित्य नाम से प्रसिद्ध हैं, मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥ 17॥
 
‘You are the embodiment of victory and bestower of welfare. Your chariot is drawn by green horses. I repeatedly salute you. O Lord Sun, adorned with thousands of rays! I repeatedly salute you. You are famous by the name Aditya because you are the son of Aditi, I salute you.॥ 17॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas