श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 105: अगस्त्य मुनि का श्रीराम को विजय के लिये “आदित्यहृदय” के पाठ की सम्मति देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.105.16 
नम: पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नम:।
ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नम:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पूर्वगिरि (उगते सूर्य) और पश्चिमगिरि (अस्त होते सूर्य) के रूप में आपको नमस्कार है। हे नक्षत्रों के स्वामी और दिन के स्वामी, आपको नमस्कार है।
 
‘Salutations to you in the form of Purvagiri – the rising sun and Paschimgiri – the setting sun. Salutations to you, the Lord of the stars and the master of the day.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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