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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.103.5 
स शरै: शरजालानि वारयन् समरे स्थित:।
गभस्तीनिव सूर्यस्य प्रतिजग्राह वीर्यवान्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वे युद्धस्थल में अविचल खड़े रहे और रावण के बाणों को अपने बाणों से विक्षेपित करते रहे। उन महाबली रघुवीर ने शत्रुओं के बाणों को सूर्य की किरणों के समान ग्रहण किया।
 
He stood steadfastly in the battle field, deflecting Ravana's arrows with his arrows. That mighty Raghuveer accepted the arrows of the enemy like the rays of the sun. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)