Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.103.4: यद्यपि युद्धभूमि रावण के धनुष से छूटे हुए बाणों की वर्षा से आच्छादित हो गई थी, फिर भी भगवान रघुनाथ विचलित नहीं हुए, क्योंकि वे विशाल पर्वत के समान अविचल थे॥4॥ | ramayan सर्ग 6.103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पूरित: शरजालेन धनुर्मुक्तेन संयुगे।
महागिरिरिवाकम्प्य: काकुत्स्थो न प्रकम्पते॥ ४॥
अनुवाद
यद्यपि युद्धभूमि रावण के धनुष से छूटे हुए बाणों की वर्षा से आच्छादित हो गई थी, फिर भी भगवान रघुनाथ विचलित नहीं हुए, क्योंकि वे विशाल पर्वत के समान अविचल थे॥4॥
Even though the battlefield was covered with a hail of arrows shot from Ravana's bow, Lord Raghunath was not shaken because he was as immovable as a huge mountain. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥