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ramayan 6.103.3: जैसे बादल आकाश से जल बरसाकर तालाब को भर देता है, वैसे ही रावण ने हजारों बाणों की वर्षा करके श्री राम को ढक दिया।   |   ramayan सर्ग 6.103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.103.3 
बाणधारासहस्रैस्तै: स तोयद इवाम्बरात्।
राघवं रावणो बाणैस्तटाकमिव पूरयन्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जैसे बादल आकाश से जल बरसाकर तालाब को भर देता है, वैसे ही रावण ने हजारों बाणों की वर्षा करके श्री राम को ढक दिया।
 
Just as a cloud fills a pond by pouring water from the sky, similarly Ravana covered Sri Rama with a shower of thousands of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)