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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.103.24 
बभूव द्विगुणं वीर्यं बलं हर्षश्च संयुगे।
रामस्यास्त्रबलं चैव शत्रोर्निधनकांक्षिण:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस समय युद्धभूमि में शत्रुओं का संहार करने की इच्छा रखने वाले श्री रामजी का बल, पराक्रम, उत्साह और अस्त्रों की शक्ति दुगुनी बढ़ गई ॥24॥
 
At that time, Sri Rama's strength, valour, enthusiasm and the power of his weapons increased twofold, who desired to slay his enemies on the battlefield. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)