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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.103.20 
अद्य ते मच्छरैश्छिन्नं शिरो ज्वलितकुण्डलम्।
क्रव्यादा व्यपकर्षन्तु विकीर्णं रणपांसुषु॥ २०॥
 
 
अनुवाद
आज तुम्हारा वह चमकते हुए कुण्डलों से सुशोभित मस्तक, जो मेरे बाणों से कटकर युद्धभूमि की धूल में पड़ा है, मांसाहारी पशुओं द्वारा घसीटा जा सकता है।
 
‘Today, your head adorned with glittering earrings, which has been cut by my arrows and lies in the dust of the battlefield, may be dragged by carnivorous animals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)