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ramayan 6.103.18: यदि तूने मेरे सामने सीता का बलपूर्वक हरण किया होता, तो मेरे योद्धाओं द्वारा तू मारा गया होता और अब तक तू अपने भाई खर को देख चुका होता॥ 18॥   |   ramayan सर्ग 6.103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.103.18 
यदि मत्संनिधौ सीता धर्षिता स्यात् त्वया बलात्।
भ्रातरं तु खरं पश्येस्तदा मत्सायकैर्हत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यदि तूने मेरे सामने सीता का बलपूर्वक हरण किया होता, तो मेरे योद्धाओं द्वारा तू मारा गया होता और अब तक तू अपने भाई खर को देख चुका होता॥ 18॥
 
If you had abducted Sita forcefully in my presence, you would have been killed by my warriors and would have seen your brother Khara by now.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)