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शूरोऽहमिति चात्मानमवगच्छसि दुर्मते।
नैव लज्जास्ति ते सीतां चौरवद् व्यपकर्षत:॥ १७॥
अनुवाद
हे दुष्ट निशाचर! तू अपने को बड़ा वीर समझता है; परन्तु जब तूने चोर की भाँति सीता का अपहरण किया, तब तुझे तनिक भी लज्जा नहीं आई?॥17॥
You evil-minded night-walker! You think yourself to be full of bravery; but when you stole Sita like a thief, did you not feel even a little ashamed?॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥