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ramayan 6.103.16: अहंकारपूर्वक किये गये उन निंदनीय और हानिकारक पापकर्मों का महान् फल आज पाओ।’ 16.   |   ramayan सर्ग 6.103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.103.16 
उत्सेकेनाभिपन्नस्य गर्हितस्याहितस्य च।
कर्मण: प्राप्नुहीदानीं तस्याद्य सुमहत् फलम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अहंकारपूर्वक किये गये उन निंदनीय और हानिकारक पापकर्मों का महान् फल आज पाओ।’ 16.
 
Receive today, the great reward for those condemnable and harmful sinful deeds committed with arrogance.' 16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)