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ramayan 6.103.14: हे पापी, निर्लज्ज और नीतिहीन, धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करने वाले, बल के अभिमान से तूने वैदेही रूपी मृत्यु को निमन्त्रण दिया है। क्या तू अब भी अपने को वीर योद्धा मानता है?॥14॥   |   ramayan सर्ग 6.103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.103.14 
भिन्नमर्याद निर्लज्ज चारित्रेष्वनवस्थित।
दर्पान्मृत्युमुपादाय शूरोऽहमिति मन्यसे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे पापी, निर्लज्ज और नीतिहीन, धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करने वाले, बल के अभिमान से तूने वैदेही रूपी मृत्यु को निमन्त्रण दिया है। क्या तू अब भी अपने को वीर योद्धा मानता है?॥14॥
 
‘You sinner, shameless and devoid of morals, who has violated the limits of religion, you have invited death in the form of Vaidehi because of your pride in your strength. Do you still consider yourself a valiant warrior?॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)