श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.103.13 
स्त्रीषु शूर विनाथासु परदाराभिमर्शनम्।
कृत्वा कापुरुषं कर्म शूरोऽहमिति मन्यसे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे निशाचर योद्धा, जो असहाय स्त्रियों के विरुद्ध वीरता दिखाते हैं! क्या तुम परस्त्री का अपहरण करने जैसा पुरुषोचित कार्य करके अपने को योद्धा समझते हो? 13॥
 
Nocturnal warriors who show bravery against helpless women! Do you consider yourself a warrior by doing a manly act like kidnapping another woman? 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)