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ramayan 6.103.11: हे नीच राक्षस! तूने मेरी असहाय पत्नी को मेरे ज्ञान के बिना ही लोक से हर लिया है, इसलिए तू न तो बलवान है और न ही वीर॥11॥   |   ramayan सर्ग 6.103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.103.11 
मम भार्या जनस्थानादज्ञानाद् राक्षसाधम।
हृता ते विवशा यस्मात् तस्मात् त्वं नासि वीर्यवान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे नीच राक्षस! तूने मेरी असहाय पत्नी को मेरे ज्ञान के बिना ही लोक से हर लिया है, इसलिए तू न तो बलवान है और न ही वीर॥11॥
 
Despicable monster! You have taken away my helpless wife from the public place without my knowledge, that is why you are not strong or brave at all. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)