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श्लोक 6.102.9  |
शीघ्रं यास्यामि देवेन्द्र सारथ्यं च करोम्यहम्।
ततो हयैश्च संयोज्य हरितै: स्यन्दनोत्तमम्॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| देवेन्द्र! मैं शीघ्र ही आपके उत्तम रथ में हरे घोड़े जोतकर उसे अपने साथ ले जाऊँगा और श्री रघुनाथजी का सारथि भी बनूँगा।॥9॥ |
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| Devendra! I will soon harness green horses to your excellent chariot and take it along with me and will also work as a charioteer for Sri Raghunathji.'॥ 9॥ |
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