श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.102.7 
रथेन मम भूमिष्ठं शीघ्रं याहि रघूत्तमम्।
आहूय भूतलं यात कुरु देवहितं महत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सारथी! रघुकुल के राजा श्री रामचन्द्रजी पृथ्वी पर खड़े हैं। मेरा रथ लेकर शीघ्र ही उनके पास जाओ। पृथ्वी पर पहुँचकर श्री राम को पुकारकर कहना, ‘यह रथ देवताओं के राजा ने तुम्हारी सेवा में भेजा है।’ इस प्रकार उन्हें रथ पर बिठाकर देवताओं के लिए महान् हितकारी कार्य सम्पन्न करो।’
 
‘Charioteer! Shri Ramchandraji, the king of the Raghu clan, is standing on the ground. Take my chariot and go to him quickly. On reaching the ground, call out to Shri Ram and say, ‘This chariot has been sent by the king of gods for your service.’ In this way, by making him sit on the chariot, accomplish a task that is of great benefit to the gods.’
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd