श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  6.102.64 
स तां मातलिना नीतां शक्तिं वासवसम्मताम्।
जग्राह परमक्रुद्धो राघवो रघुनन्दन:॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
रघुकुलनन्दन रघुवीर ने अत्यन्त क्रोध में भरकर मातलिकि द्वारा लाई हुई देवेन्द्र द्वारा प्रदत्त शक्ति को अपने हाथ में ले लिया ॥64॥
 
Raghukulnandan Raghuveer, filled with extreme anger, took in his hands the power conferred by Devendra brought by Mataliki. 64॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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