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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना
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श्लोक 51
श्लोक
6.102.51
तच्छूलं परमक्रुद्धो जग्राह युधि वीर्यवान्।
अनीकै: समरे शूरै राक्षसै: परिवारित:॥ ५१॥
अनुवाद
रणभूमि में अनेक सेनाओं में विभक्त वीर योद्धाओं से घिरा हुआ वह वीर राक्षस बड़े क्रोध से उस भाले को ग्रहण करने लगा ॥51॥
On the battlefield, surrounded by valiant warriors divided into several armies, that valiant demon received that spear with great anger. ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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