श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.102.50 
त्रासनं सर्वभूतानां दारणं भेदनं तथा।
प्रदीप्त इव रोषेण शूलं जग्राह रावण:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
उसका नाम शौल था। वह समस्त भूतों को टुकड़े-टुकड़े करके भयभीत करने में समर्थ था। क्रोध से भरकर रावण ने उस शौल को हाथ में ले लिया।
 
Its name was Shaul. It was capable of frightening all the ghosts by tearing them into pieces. Ravana, infuriated with anger, took that Shaul in his hand. 50.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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