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ramayan 6.102.48-49: वह वज्र के समान शक्तिशाली, भयंकर ध्वनि करने वाला और समस्त शत्रुओं का नाश करने वाला था। उसकी शिखाएँ पर्वतों की चोटियों के समान थीं। वह मन और आँखों को भी भयभीत करने वाला था। उसके अग्र भाग अत्यंत तीखे थे। वह प्रलयकाल की धुएँ से भरी हुई अग्नि के समान अत्यंत भयानक प्रतीत होता था। काल के लिए भी उसे प्राप्त करना या नष्ट करना कठिन और असंभव था। 48-49   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 48-49
 
 
श्लोक  6.102.48-49 
वज्रसारं महानादं सर्वशत्रुनिबर्हणम्।
शैलशृङ्गनिभै: कूटैश्चित्तदृष्टिभयावहम्॥ ४८॥
सधूममिव तीक्ष्णाग्रं युगान्ताग्निचयोपमम्।
अतिरौद्रमनासाद्यं कालेनापि दुरासदम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
वह वज्र के समान शक्तिशाली, भयंकर ध्वनि करने वाला और समस्त शत्रुओं का नाश करने वाला था। उसकी शिखाएँ पर्वतों की चोटियों के समान थीं। वह मन और आँखों को भी भयभीत करने वाला था। उसके अग्र भाग अत्यंत तीखे थे। वह प्रलयकाल की धुएँ से भरी हुई अग्नि के समान अत्यंत भयानक प्रतीत होता था। काल के लिए भी उसे प्राप्त करना या नष्ट करना कठिन और असंभव था। 48-49
 
He was as powerful as a thunderbolt, made a great sound and was the destroyer of all enemies. His crests were like the peaks of mountains. He was frightening even to the mind and the eyes. His front parts were very sharp. He appeared extremely terrifying like the smoke filled fire during the time of doomsday. It was difficult and impossible even for time to get or destroy him. 48-49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)