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ramayan 6.102.4: श्री रामचन्द्र जी भी एकाग्रचित्त होकर युद्धस्थल में दसमुख वाले रावण पर प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी सुवर्णमय बाणों की वर्षा करने लगे॥4॥   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.102.4 
दीप्तपावकसंकाशै: शरै: काञ्चनभूषणै:।
अभ्यवर्षद् रणे रामो दशग्रीवं समाहित:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्र जी भी एकाग्रचित्त होकर युद्धस्थल में दसमुख वाले रावण पर प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी सुवर्णमय बाणों की वर्षा करने लगे॥4॥
 
Shri Ramchandra ji also became concentrated and started showering golden arrows, as bright as blazing fire, on the ten-faced Ravana in the battlefield. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)