श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.101.4 
शोणितार्द्रमिमं वीरं प्राणै: प्रियतरं मम।
पश्यतो मम का शक्तिर्योद‍्धुं पर्याकुलात्मन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रा का यह वीर पुत्र मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय है। उसे लहूलुहान देखकर मेरा हृदय व्याकुल हो रहा है। ऐसी स्थिति में क्या मुझमें लड़ने की शक्ति होगी?
 
This brave son of Sumitra is dearer to me than my life. Seeing him bleeding, my heart is troubled. In such a condition, will I have the strength to fight?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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